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फिल्म स्टार संजय दत्त ने गया में 7 पीढ़ियों के लिए किया पिंडदान

फिल्म स्टार संजय दत्त ने गया में 7 पीढ़ियों के लिए किया पिंडदान

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फिल्म स्टार संजय दत्त ने गया में 7 पीढ़ियों के लिए किया पिंडदान

फिल्म स्टार संजय दत्त ने गया में 7 पीढ़ियों के लिए किया पिंडदान

बिहार / गया । गुरुवार को बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त अपने पूर्वजों के पिंडदान के लिए बिहार के गया पहुंचे। एक्टर संजय दत्त ने गया के विष्णुपद के पास अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान किया। अपनी एक दिवसीय गया दौरे के दौरान फिल्म अभिनेता संजय दत्त गया एयरपोर्ट से कड़ी सुरक्षा के बीच विष्णुपद मंदिर पहुंचे। और विष्णुपद मंदिर के समीप ही उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त एवं मां नर्गिस समेत अपने पूर्वजों का पिंडदान किया। अपने गया दौरे के दौरान संजय दत्त सफेद रंग के कुर्ता-पजामा पहने हुए थे। उन्होंने गायपाल पंडा अमरनाथ मेहरवार की देखरेख में पिंडदान की प्रक्रिया को पूर्ण किया।

संजय दत्त ने अपने पिता स्वर्गीय सुनील दत्त एवं माता नरगिस सहित अन्य पितरों का पिंडदान किया। उन्होंने विशेष तौर पर फल्गु घाट, वट वृक्ष एवं देवघाट पर पिंडदान किया। उनके पितरों का पिंडदान अमरनाथ मेहरवार के द्वारा विधिवत रूप से संपन्न करावाया । पुरोहित अमरनाथ मेहरवार ने कहा कि संजय दत्त अपने कुछ रिश्तेदार एवं मित्र के साथ विशेष तौर पर गया में पिंडदान करने के लिए ही आए थे। उन्होंने 45 मिनट तक पूरा पिंडदान किया

इस दौरान संजय दत्त के साथ उनके 2 सहयोगी भी गया आए थे। वहीं संजय दत्त के गया पहुंचने को लेकर गया एयरपोर्ट से लेकर विष्णुपद मंदिर तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इस दौरान गया एयरपोर्ट पर पत्रकारों के द्वारा अयोध्या जाने के सवाल पर संजय दत्त ने साफ-साफ कहा कि हम अयोध्या अवश्य जाएंगे, क्यों नहीं जाएंगे वहीं उन्होंने जय श्री राम के भी नारे लगाए। उन्होंने कहा कि हम गया पिंडदान करने के लिए आए हुए है।

फिल्म अभिनेता संजय दत्त

ज्ञात हो कि गया में पिंडदान का विशेष महत्व माना गया है। गया में पिंडदान का विशेष महत्व भी है। धार्मिक मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से 108 कुल एवं 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। गरुड़ पुराण के आधारकाण्ड में भी गया में पिंडदान का महत्व बताया गाया है। ऐसी मान्यता है कि गया में भगवान राम एवं सीता ने पिता राजा दशरथ को पिंडदान किया था। यदि इस स्थान पर पितृपक्ष में पिंडदान किया जाए तो पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होता है। धार्मिक मान्यता भी है कि भगवान श्रीहरि यहां पर पितृ देवता के रूप में स्वयं विराजमान रहते हैं। इसी लिए भी इसे पितृ तीर्थ कहा जाता है।

 

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