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वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा

वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा

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वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा

वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा

वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आज पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को ज्ञापन दिया।

ये हैं प्रमुख मांगे

अनुदान की राशि में बढ़ोतरी को लेकर गठित कमेटी के अनुशंसा को एक वर्ष तक रोक कर रखने, उस पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं करने, मंत्री परिषद की सहमति नहीं लेने को लेकर ज्ञापन दिया गया।

ज्ञापन में कहा गया है कि महंगाई को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश और शिक्षा मंत्री के आदेश के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने अनुदान की राशि में बढ़ोतरी को लेकर एक कमेटी गठित करने का प्रस्ताव तत्कालीन विभागीय मंत्री को भेजा था। प्रस्ताव में यह भी था कि कमेटी एक माह के अंदर अपनी अनुशंसा वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अनुदान बढ़ोतरी के मांग पर अपने अनुशंसा भेजी।

दिनांक 03.11. 2022 को विभागीय सचिव के. रवि कुमार ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री को प्रस्ताव भेजा । कमेटी के अध्यक्ष निदेशक माध्यमिक शिक्षा बनाए गए थे ।कमेटी में वित्त विभाग एवं कार्मिक विभाग के प्रतिनिधि भी रखे गए थे ।विभागीय प्रस्ताव पर मंत्री ने अनुमोदन कर संचिका आवश्यक कार्रवाई के लिए विभाग को लौटा दिया। मंत्री ने कमेटी के अनुशंसा पर मंत्रिमंडल की सहमति के लिए लिखा था।

दिनांक 07.12.2022 को कमेटी की बैठक हुई। जिसमें सातों सदस्य उपस्थित थे ।और कमेटी ने 2015 नियमावली में स्लैब में संशोधन कर 75% यानी 3/4 की बढ़ोतरी कर अपनी अनुशंसा सरकार को दे दिया।

13 माह बीत गए ।अभी तक कमेटी के अनुशंसा पर संलेख बनकर न वित्त विभाग को गया और ना ही विधि विभाग को।

ज्ञापन में कहा गया है कि मोर्चा के प्रतिनिधि विभागीय सचिव के. रवि कुमार से अनेको बार मिला और कमेटी के अनुशंसा पर अभिलंब कार्रवाई करने का आग्रह किया।शिक्षा सचिव ने अधीनस्थ पदाधिकारी को निर्देश भी दिए। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मोर्चा ने ज्ञापन में यह भी दिया है कि इसको लेकर विधानसभा सत्र के सामने मोर्चा ने महा धरना भी दिया था ।

एक दर्जन से ज्यादा विधायकों ने शिक्षा सचिव को पत्र भी लिखे हैं। परंतु अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई ।

यह मामला बीते सत्र में भी उठा था और सरकार ने जवाब दिया है कि कमेटी का प्रतिवेदन प्राप्त है लेकिन कार्रवाई अभी नहीं हुई है।

ज्ञापन में कहा गया है की डिग्री कॉलेज के अनुदान में वृद्धि की अधिसूचना मंत्री परिषद के सहमति के बाद जारी हो गई है । लेकिन वित रहीत स्कूल कॉलेज के अनुदान में बढ़ोतरी के अनुशंसा को विभाग रोक कर रखा है ।

मुख्यमंत्री के ज्ञापन में मोर्चा ने लिखा है कि एक तरफ सरकारी पदाधिकारी/ कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का लाभ मिल रहा है। लेकिन वित रहीत स्कूल कॉलेज के शिक्षकों को इस महंगाई के समय में भी 2015 नियमावली के अनुसार बहुत कम राशि मिल रही है।

ज्ञापन में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि मुख्यमंत्री जी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को अभिलंब संलेख वित्त विभाग एवं विधि विभाग से कराकर कैबिनेट में सहमति के लिए भेजने का आवश्यक आदेश दें। ताकि इस महंगाई के समय में शिक्षक कर्मचारियों को राहत मिल सके।

मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने वालों में रघुनाथ सिंह, नरोत्तम सिंह, विजय झा ,संजय कुमार और चंद्रशेखर थे ।

उक्त बातों की जानकारी प्रेस को मनीष कुमार एवं अरविंद सिंह ने दिया है।

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