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अप्रैल में तीन चरणों मे होगा लोकसभा चुनाव, चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक बुलाई

अप्रैल में तीन चरणों मे होगा लोकसभा चुनाव, चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक बुलाई

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अप्रैल में तीन चरणों मे होगा लोकसभा चुनाव, चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक बुलाई

अप्रैल में तीन चरणों मे होगा लोकसभा चुनाव, चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक बुलाई

लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने झारखंड-बिहार सहित सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक बुलाई है। बैठक राम मंदिर के उद्घाटन यानी 22 जनवरी के करीब 10 दिन पहले 11-12 को संभावित है। दो दिनों के सीईओ (मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी) कॉन्फ्रेंस से संकेत साफ है कि इसमें तैयारियों की समीक्षा के साथ संभावित तारीखों पर चर्चा होगी। बैठक के तत्काल बाद आयोग की टीम झारखंड- बिहार सहित अन्य राज्यों का दौरा करेगी और उसके बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा। फरवरी के पहले पखवारे में चुनाव आयोग की टीम बिहार का दौरा कर सकती है।

झारखंड-बिहार में चुनाव को लेकर चल रही तैयारियां बता रही हैं कि 2019 की तुलना में इस बार थोड़ा पहले चुनाव की घोषणा हो सकती है। उम्मीद है कि इस बार फरवरी के अंतिम सप्ताह या फिर 10 मार्च के पहले चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। 2019 में 10 मार्च को चुनाव की घोषणा हुई थी। होली का पर्व मार्च के अंतिम सप्ताह में है और इसको ध्यान में रखकर तारीखें तय होंगी। सूत्रों की मानें तो इस बार अप्रैल में ही चुनाव के तीन चरण होंगे। 2019 में झारखंड-बिहार में चार और देश में सात चरण में वोट पड़े थे।

फरवरी से चुनावी मोड में होगा जिलों का प्रशासनिक तंत्र

1 फरवरी से झारखंड-बिहार का पूरा प्रशासनिक तंत्र चुनावी मोड में होगा। 31 जनवरी तक आयोग ने सभी प्रक्रिया पूरी कर राज्यों के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है। इस लिहाज से फील्ड में वही अफसर तैनात होंगे जिन्हें लोकसभा चुनाव कराना है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया 31 जनवरी तक पूरी होनी है

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की गाइडलाइन 21 दिसंबर को ही जारी कर दी है। आयोग ने स्प्ष्ट कर दिया है कि निर्वाचन कार्यों से सीधे तौड़ पर जुड़े अफसरों को उनके गृह जिले या उन जिलों में तैनात नहीं किया जाएगा जहां वे लंबे समय तक काम कर चुके हैं। इस दायरे में डीसी-एसपी से लेकर उनसे नीचे के कई पुलिस व प्रशासनिक अफसर आ जाएंगे। पिछले चार वर्षों में (कट ऑफ डेट 30 जून 2024 तक) जिन अफसरों का कार्यकाल 3 वर्ष का पूरा हो चुका होगा उनका तबादला किया जाना है। 3 वर्ष की अवधि को जोड़ने में संबंधित जिले में उनको प्रोन्नति देकर किसी अन्य पद पर तैनात किए जाने वाली अवधि भी जोड़ी जाएगी।

चुनाव आयोग की गाइडलाइन के दायरे में आएंगे जो अफसर

 जिला स्तर पर यह आदेश जिला निर्वाचन पदाधिकारी, उप जिला निर्वाचन पदाधिकारी, निर्वाची पदाधिकारी, सहायक निर्वाची पदाधिकारी से इतर एडीएम, एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर, ज्वाइंट कलेक्टर, तहसीलदार, बीडीओ और इस रैंक के दूसरे अफसरों पर लागू होगा।

पुलिस प्रशासन: पुलिस महकमे में रेंज आईजी, डीआईजी, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बल के कमांडेंट, एसएसपी, एसपी, एएसपी, एसडीपीओ, एसएचओ, इंस्पेक्टर, , सब इंस्पेक्टर व वैसे अफसर जिनकी भूमिका चुनाव के वक्त सुरक्षा बलों की तैनाती में होती है। सब इंस्पेक्टर और उससे ऊपर के पुलिस अफसरों को उनके गृह जिला में तैनात नहीं किया जाएगा। तबादले की प्रक्रिया पूरी कर इससे संबंधित सूचना 31 जनवरी तक आयोग को देनी है।

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