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कोर्ट का सरकार को आदेश, तीन हफ्ते के अंदर चुनाव की घोषणा का जारी करें नोटिफिकेशन

अप्रैल में तीन चरणों मे होगा लोकसभा चुनाव, चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की बैठक बुलाई

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कोर्ट का सरकार को आदेश, तीन हफ्ते के अंदर चुनाव की घोषणा का जारी करें नोटिफिकेशन

कोर्ट का सरकार को आदेश, तीन हफ्ते के अंदर चुनाव की घोषणा का जारी करें नोटिफिकेशन

निकाय चुनाव को कराने वाली याचिका को कोर्ट ने निस्पादित कर दी और सरकार को तीन हफ्ते में चुनाव की घोषणा के आदेश दिया है।

स्थानीय शहरी निकाय चुनाव कराने को लेकर पार्षद रोशनी खलखो वर्सेस झारखण्ड सरकार मामले में उच्च न्यायालय मे किए गए याचिका मामले में माननीय जसटीस अनंदा सेन के कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमे उक्त मामले में सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया गया है , जवाब में सरकार द्धारा विकास किशन राव गवली वर्सेस महाराष्ट्र सरकार के रिट याचिका संख्या 980/2019 में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उक्त केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश हैं कि ट्रिपल टेस्ट कराकर ही निकाय/पंचायत चुनाव कराए जाए, उक्त जवाब पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनोद सिंह ने सरकार के आए जवाब पर जवाब दाखिल किया कि यहां सरकार 74वे एवं अन्य प्रावधानों का उलंघन तो कर ही रही है साथ ही सरकार अब आधे अधूरे जवाब के साथ माननीय कोर्ट को भी अंधेरे में रख कर दिगभ्रमित कर रही है।

सरकार विकास किशन राव गवली वर्सेज महाराष्ट्र सरकार याचिका का जिक्र तो कर रही है लेकिन सुरेश महाजन वर्सेज मध्य प्रदेश के रिट याचिका संख्या 278/2022 का जिक्र नहीं कर रहीं हैं न ही अपने जवाब में इसको लाया है क्योंकि उक्त केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सरकार को ओबीसी आरक्षण ट्रिपल टेस्ट कराकर ही निकाय/पंचायत चुनाव कराना है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव ही नहीं कराए जाए।

क्योंकि किसी भी परिस्थिति में चुनाव नहीं कराना सविधान की मूल अवधारणा धारा का हनन है, इसलिए ओबीसी आरक्षण कर चुनाव कराना एक प्रक्रिया है लेकिन इसके कारण चुनाव नहीं कराना गलत है इसलिए उक्त केस में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव नहीं रोकने का आदेश दिया और उक्त आदेश में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि इस आदेश को रद्द या रोक सुप्रीम कोर्ट भी नहीं कर सकता है। और इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के साथ देश के सभी राज्यों के लिए बताया है, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बिनोद सिंह ने कहा कि सरकार का जवाब अधूरा है और झारखंड में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवमानना किया है इसलिए मेरे क्लाइंट श्रीमति रोशनी खलखो ने सरकार के ऊपर अलग से एक आवमाना याचिका भी दायर किया है, कयोंकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी सरकार आधी अधूरी बात के साथ जनता के साथ कोर्ट का समय भी बर्बाद कर रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना कर रही है, इन बातो पर जस्टिस आनंद सेन ने याचिका को निस्पादित करते हुए कहा कि सरकार ने स्थानिक ब्रेकडाउन संवैधानिक ब्रेकडाउन किया है इसलिए कोर्ट सरकार को तीन हफ्ते के अंदर चुनाव की घोषणा का नोटिफिकेशन करने को कहा।

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