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पारा शिक्षकों को झटका : इस परिस्थिति में स्थायीकरण सम्भव नहीं

पारा शिक्षकों को झटका : इस परिस्थिति में स्थायीकरण सम्भव नहीं

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पारा शिक्षकों को झटका : इस परिस्थिति में स्थायीकरण सम्भव नहीं

पारा शिक्षकों को झटका : इस परिस्थिति में स्थायीकरण सम्भव नहीं

राँची : झारखंड विधानसभा का शीत कालीन सत्र चल रहा है। जिसमें विधायक भानू प्रताप शाही द्वारा पारा शिक्षकों के स्थाईकरण और वेतनमान के मुद्दों को लेकर प्रश्न किया था।
जिसके बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भवनाथपुर के भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही के प्रश्न के जवाब में इसे स्पष्ट कर दिया। विभाग ने बताया कि
वर्तमान परिस्थिति में पारा शिक्षकों का स्थायीकरण संभव नहीं है। इनके स्थायीकरण के मामले को झारखंड उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय ने भी खारिज कर दिया है। बतादें कि विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार बनाने के नाम पर कई लंबे लंबे वादे वर्तमान मुख्यमन्त्री द्वारा किए गए थे।

शिक्षा विभाग ने पारा शिक्षकों को वेतनमान देने में कठिनाइयों पर कहा कि इनका चयन संबंधित विद्यालय की ग्राम शिक्षा समिति द्वारा आरक्षण के प्रविधान के बिना ही किया गया है। वेतनमान लागू करने के लिए पद सृजन भी आवश्यक है और पद सृजन के लिए रोस्टर का अनुपालन जरूरी है। झारखंड उच्च न्यायालय ने भी इस मामले को खारिज कर दिया है।

इसके विरुद्ध वादी पारा शिक्षकों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर की गई थी, जिसमें पारित न्यायादेश में भी इन्हें अंतरिम राहत नहीं मिली। न्यायालय ने पारा शिक्षकों के स्थायीकरण से संबंधित 13 याचिकाओं को अबतक खारिज कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा पारा शिक्षकों के लिए सेवा शर्त नियमावली गठित की है, जिसके तहत टेट उत्तीर्ण पारा शिक्षकों के मानदेय में एकमुश्त 50 प्रतिशत और गैर टेट उत्तीर्ण पारा शिक्षकों के मानदेय में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

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