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झारखंड कैबिनेट की बैठक में नई नियोजन नीति पर मुहर : 10 वीं 12वीं की बाध्यता खत्म

झारखंड कैबिनेट की बैठक में नई नियोजन नीति पर मुहर : 10 वीं 12वीं की बाध्यता खत्म

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झारखंड कैबिनेट की बैठक में नई नियोजन नीति पर मुहर : 10 वीं 12वीं की बाध्यता खत्म

झारखंड कैबिनेट की बैठक में नई नियोजन नीति पर मुहर : 10 वीं 12वीं की बाध्यता खत्म





गुरुवार को झारखंड कैबिनेट में हेमंत कैबिनेट की बैठक में 35 प्रस्तावों पर मंजूरी दी गई। जिसमे सबसे महत्वपूर्ण नई नियोजन नीति पर मुहर लगा। अब रोजगार के लिए झारखंड के ही शैक्षणिक संस्थानों से 10 वीं एवं 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण होने की बाध्यता को नियोजन नीति से हटा दिया गया है।




हेमंत कैबिनेट में जेएसएससी के कई नियुक्ति नियमावली को भी वापस कर लिया गया है। नियमावली वापस लेते ही पूर्व की नीति यानी 2016 से पहले की नीति राज्य में लागू हो गया है। युवाओं से मिली सलाह के बाद हेमंत सरकार ने इस पर फैसला लिया है।

झारखंड सरकार ने इस नियमावलियों में संशोधन किया है। अब ये बदलाव

1. JSSC इंटरमीडिएट 10+2 परीक्षा नियमवाली में संशोधन

2. JSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा नियमवाली में संशोधन

3. JSSC स्नातक स्तरीय तकनीकी परीक्षा नियमवाली में संशोधन

4. JSSC सचिवालय आशुलिपिक ग्रेड परीक्षा नियमवाली में संशोधन




5. JSSC पुलिस भर्ती परीक्षा नियमवाली में संशोधन

6. JSSC मैट्रिक स्तरीय परीक्षा नियमवाली में संशोधन

7. JSSC स्नातक शिक्षक(TGT) और स्नातकोत्तर शिक्षक (PGT) परीक्षा नियमवाली में संशोधन

8. JSSC डिप्लोमा स्तरीय परीक्षा नियमवाली में संशोधन




भाषा में हिंदी,अंग्रेजी और संस्कृत जोड़ा गया।

राज्य से 10वीं/12वीं की भी अनिवार्यता हटायी गई।

वहीं पूर्व की रघुवर सरकार द्वारा 2016 के समय की 13 जिला एवं 11 जिलों की नियोजन नीति को सुप्रीम कोर्ट रद्द कर चुकी है। वहीं हेमंत सरकार की भी नियोजन नीति 2021 को भी झारखंड हाई कोर्ट रद्द कर चुका है।




नई नियोजन में अब क्या होगा

हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी हेमंत सरकार की 2021 की नीति में क्षेत्रीय भाषा के पत्र के रूप में हिंदी को मान्यता नहीं दी गई थी पर इस बार इसे क्षेत्रीय भाषा के वैकल्पिक पत्र के रूप में रखा जाएगा।

झारखंड के ही शैक्षणिक संस्थानों से ही 10वीं व 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण होने की बाध्यता को खत्म किया जाएगा। परीक्षाओं में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के लिए स्थानीय रीति-रिवाज, परंपरा की जानकारी की शर्त भी हटेगा।




इसके अंतर्गत पदों में 60:40% आरक्षण का पालन किया जाएगा। 60 %आरक्षण में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, ओबीसी एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग शामिल रहेंगे । वहीं 40% सीट पूरी तरह ओपन रहेगा।

इसके अलावे इन पर भी लगी मुहर




द इटकी ट्यूबरकुलोसिस सेनेटोरियम (रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग) एक्ट-1951 को वापस लेने की स्वीकृति

श्रम विभाग के छह विधेयकों को वापस लेनी के प्रस्ताव को मिली स्वीकृति

बतादें कि रघुवर सरकार के समय पारित हुए थे सभी छह विधेयक भारत सरकार ने इन विधायकों के प्रावधानों पर आपत्ति जतायी थी।





– द झारखंड शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट (अमेंडमेंट) बिल 2018

– द फैक्ट्री (झारखंड अमेंडमेंट) बिल 2019

– द कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड एबोलिशन) (झारखंड अमेंडमेंट) बिल 2015

– द बिहार इंडस्ट्रियल एस्टेब्लिशमेंट (नेशनल एंड फेस्टिवल हॉलिडे एंड कैजुअल लीव) झारखंड अमेंडमेंट बिल 2015

– द इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट (झारखंड अमेंडमेंट) बिल 2018

– द झारखंड लेबर लॉ (अमेंडमेंट) एंड मिसलेनियस प्रोविजन बिल 2018



इसके अलावा ओलंपिक खेलों में जितने वाले खिलाड़ियों को मिलने वाले पुरस्कार राशि में भी संशोधन किया गया है।
इसके तहत स्वर्ण पदक जीतने वालों को 2 करोड़ के बदले अब 5 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

वहीं झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग नियमावली एवं झारखंड दिव्यांगजन नियमावली में भी संशोधन की गई है।

इसके अंतर्गत वार्षिक माध्यमिक इंटरमीडिएट छात्र-छात्राओं को पुरस्कार राशि लैपटॉप व मोबाइल प्रदान करने की स्वीकृति मिली है।




10वीं और 12वीं टॉपर को मिलेगा 3 लाख

10वीं और 12वीं में पहले दूसरे और तीसरे टॉपर को 3 लाख, 2 लाख और 1 लाख नकद सहित लैपटॉप, मोबाइल दिए जाएंगे।

वहीं साहिबगंज में मॉडल डिग्री कॉलेज अब राज्य मद से बनाए जाएगा।





पूरी डिटेल सुने

 

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