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झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर जतायी नाराजगी, 467 पदों पर नियुक्ति को लेकर कही यह बात

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झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर जतायी नाराजगी, 467 पदों पर नियुक्ति को लेकर कही यह बात

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स में इलाज की लचर व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जतायी है। साथ ही विभिन्न संवर्गों में रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोट्र ने कहा कि रिम्स प्रबंधन को शर्म आनी चाहिए कि रिम्स में एक ट्राॅली (स्ट्रेचर) के लिए मोबाइल गिरवी रखना पड़ता है। ऐसा लगता है कि रिम्स की कार्यशैली बद से बदतर हो गयी है और इसे कोर्ट के द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।

चतुर्थ वर्ग के 467 पदों पर नियुक्ति मामले की जांच के लिए समिति गठित करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चतुर्थ वर्ग के 467 विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए प्रकाशित विज्ञापन और उसके बाद संशोधित विज्ञापन में की गयी गलतियों की जांच के लिए समिति गठित करने की बात कही।

बता दें कि चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में नियुक्ति मामले की सुनवाई हुई। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तिथि निर्धारित की गई है। बता दें कि इससे पूर्व रिम्स की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने पैरवी की थी।

सभी पद झारखंड के लोगों के लिए कैसे आरक्षित किया गया

सुनवाई के दौरान हाई कोट्र ने पूछा था कि किस कानून, नियम, परिनियम, सरकुलर या सरकार के किस आदेश से इस तरह का आवेदन मांगा गया है। कहा कि सभी पद झारखंड के लोगों के लिए कैसे आरक्षित कर दिया गया।

बता दें कि रिम्स में चतुर्थ वर्ग के 467 विभिन्न पदों पर चल रही नियुक्ति प्रक्रिया के तहत चयनित अभ्यर्थियों को अगले आदेश तक नियुक्ति पत्र देने पर भी रोक लगा दी थी।

झारखंड हाईकोर्ट

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